केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1080 में से 347 प्रतिष्ठित खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा किया है। पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है।जम्मू-कश्मीर के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर जम्मू-कश्मीर का गौरव बढ़ा रहे हैं।
 


केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में खेलों को बढ़ावा देने की दिशा में जिस तरह के प्रयास हो रहे हैं और जिस तरह से मैदानों का कायाकल्प किया जा रहा है। उसे देखते हुए खिलाड़ियों की ढांचागत सुविधाएं न मिलने की शिकायतें तो दूर हो ही रही हैं। जिस तरीके से मैदानों का आधुनिकरण हो रहा है। जिस तरीके से मैदानों को सजाया जा रहा है। उसे देखते हुए विश्वास होने लगा है कि जल्द जम्मू-कश्मीर की पहचान खेल मैदानों से होने लगेगी।

केंद्र शासित प्रदेश सरकार ने विभिन्न योजनाओं के तहत कुल 1080 में से 347 प्रतिष्ठित खेल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को पूरा किया है। पंचायत स्तर से राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। जिसका परिणाम है कि जम्मू-कश्मीर के विभिन्न खेलों के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर जम्मू-कश्मीर का गौरव बढ़ा रहे हैं। जम्मू-कश्मीर ने 2020-21 में विभिन्न खेलों में 72 स्वर्ण, 90 रजत, 145 कांस्य पदक जीत कर एक रिकार्ड बनाया है। इससे साफ है कि नई खेल नीति और ढांचागत सुविधाओं के मिलने और खिलाड़ियों के प्रोत्साहन के परिणाम दिखने लगे हैं।

हाल ही में, जम्मू-कश्मीर के खिलाडि़यों ने विभिन्न राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके केंद्र शासित प्रदेश का सम्मान बढ़ाया है।अधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ने 2020-21 में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 14 खेलों में 72 स्वर्ण, 90 रजत और 145 कांस्य पदक जीते। केंद्र शासित प्रदेश की इस खेल क्षमता को स्वीकार करते हुए, प्रधान मंत्री ने खेल के बुनियादी ढांचे के विकास और क्षेत्र में नवोदित प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने के लिए प्रधान मंत्री विकास पैकेज के तहत 200 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। पैकेज, जिसका उद्देश्य खेल के बुनियादी ढांचे, प्रशिक्षण सुविधाओं को बढ़ावा देना और पेशेवर कोच प्रदान करना था, ने जम्मू-कश्मीर के खेल क्षेत्र में क्रांति ला दी है।जम्मू के एमए स्टेडियम में फेंसिंग अकैडमी बनने से फेंसिंग के खिलाड़ियों को खेलों इंडिया योजना का बहुत बड़ा लाभ मिलने वाला है।

बदलने लगा एम ए स्टेडियम का रूप

वर्षों पुराने एमए स्टेडियम का रूप पूरी तरह से बदलने लगा है। मुख्य गेट से लेकर बाहरी दीवारों तक को नया रंग रूप दिया जा रहा है। स्टेडियम की दीवारों पर विभिन्न खेलों के खिलाड़ियों के दीवारों पर कलाकृतियां उकेरी जा रही हैं। जिन्हें बाहर से देखने पर ही खेलों का एक माहौल बनता दिखता है। वहीं मिन्नी स्टेडियम परेड में बन रहे फुटबाल एस्ट्रो टर्फ का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही पुराने जम्मू शहर में फिर से फुटबाल के पुराने दिन लौटेंगे। इसी तरह कश्मीर में भी मैदानों का तेजी से रंग रूप बदला जा रहा है।इससे खिलाड़ी काफी उत्साहित हैं।




नई दिल्ली, टेक डेस्क।
 लोगों की जरूरत का ध्यान रखते हुए गूगल आए दिन अपने वीडियो-कॉलिंग प्लेटफॉर्म गूगल मीट के लिए नए फीचर्स लाता रहता है। इस बार Google ने नए Google Workplace घोषणाओं के एक भाग के रूप में डॉक्स, स्लाइड्स और शीट्स के साथ Google Meet के नए सहयोग की घोषणा की। ये नया फीचर यूजर्स को तीन में से किसी भी ऐप पर काम करते हुए एक ही टैब में मीट कॉल को शुरू करने की अनुमति देगा। बता दें कि इस फीचर के पहले वेब पर रोल आउट होने की उम्मीद है। वीडियो मीटिंग को अधिक प्रोडक्टिव बनाने के लिए Google मीट नए सुधार जोड़ रहा है। बता दें कि वीडियो-कॉलिंग प्लेटफॉर्म ने हाल ही में एक फीचर की घोषणा की थी, जो आपको मीटिंग से बाहर निकलने की अनुमति देगा, जब आप मीटिंग में अकेले बचे होंगे।

Google द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में फीचर को पेश करते हुए, डेस्कटॉप पर मीट इंटीग्रेशन दिखाया गया है। अभी तक स्मार्टफोन में फीचर के रोल आउट होने की कोई खबर नहीं है और यह स्पष्ट नहीं है कि यह कैसे काम कर सकता है।

वीडियो-कॉलिंग प्लेटफॉर्म ने पिछले हफ्ते घोषणा की थी कि अब यह आपको मीटिंग से बाहर निकलने की अनुमति देगा, जब आप मीटिंग में अकेले होंगे। इस अपडेट के साथ, जब आप पांच मिनट के लिए मीटिंग में एकमात्र भागीदार होते हैं, तो आपको एक मैसेज मिलेगा कि आप मीटिंग में रहना चाहते हैं या छोड़ना चाहते हैं। अगर आप दो मिनट के बाद भी जवाब नहीं देते हैं, तो आप मीटिंग से अपने आप बाहर हो जाएंगे। इसके अलावा, मेनू के बीच स्विच करना आसान बनाने के लिए, Google मीट में होस्ट मैनेजमेंट कंट्रोल्स को केंद्रीकृत कर रहा है।




कल्पना कीजिए कि अगर आपके शहर का तापमान अचानक से लगभग 40 डिग्री तक बढ़ जाए तो क्या होगा? जैसे.. मंगलवार को दिल्ली का अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को भी पार कर गया. लेकिन सोचिए, अगर ये 80 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाए तो दिल्ली में कैसे हालात होंगे. यकीन मानिए ये स्थिति मौत से भी बदतर होगी. आपको 24 घंटे ऐसा लगेगा कि आप किसी जलते हुए तंदूर में बैठे हैं और इस स्थिति में कई लोगों की हीटस्ट्रोक की वजह से मौत हो जाएगी. अब इस कल्पना से बाहर आपको असली दुनिया में लाते हैं और ये बताते हैं कि जिस अंटार्कटिका को दुनिया का सबसे ठंडा इलाका माना जाता है, उस अंटार्कटिका में भी अब लू चल रही है. वहां तापमान सामान्य से लगभग 40 डिग्री ज्यादा पहुंच गया है.

अंटार्कटिका कर रहा बड़े संकट की तरफ इशारा

18 मार्च को अंटार्कटिका के Concordia (कॉनकॉर्डिया) Research Station में मायनस 12.2 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिसे दुनियाभर के वैज्ञानिक चिंताजनक मान रहे हैं. दरअसल, मार्च के महीने में इस जगह पर सामान्य तापमान मायनस 50 डिग्री सेल्सियस रहता है. लेकिन इस बार ये मायनस 12.2 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया. यानी इस हिसाब से इस जगह का तापमान सामान्य से लगभग 40 डिग्री तक बढ़ गया. आम तौर पर तापमान में चार से पांच डिग्री सेल्सियस का अंतर दर्ज होता है और इसे भी खतरनाक माना जाता है. लेकिन 40 डिग्री सेल्सियस का अंतर एक बड़े संकट की तरफ इशारा करता है. अंटार्कटिका में जिस स्थान पर ठंड लोगों का खून जमा देती थी, अब वहां लोग शर्ट उतारकर तस्वीरें खिंचवा रहे हैं, जैसे वो अंटार्कटिका में नहीं, गोवा के किसी बीच पर हों. 

अंटार्कटिका में गर्म हवा और नमी की मात्रा बढ़ी

अंटार्कटिका का Concordia (कॉनकॉर्डिया) Research Station समुद्र तल से 3 हजार 234 मीटर की ऊंचाई पर है. इसकी शुरूआत वर्ष 2005 में फ्रांस और इटली ने की थी. इसके अलावा अंटार्कटिका के एक और रिसर्च स्टेशन Vostok (वोस्तोक) का तापमान 18 मार्च को मायनस 17.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इन दिनों में मायनस 35 डिग्री के आसपास रहता है. यानी जिस अंटार्कटिका को अब तक दुनिया उसकी ठंड के लिए जानती थी, अब वहां भी लू चल रही है. वहां तापमान में असामान्य बदलाव देख जा रहे हैं. Vostok (वोस्तोक) वही जगह है, जहां रशिया का रिसर्च स्टेशन है. अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी NASA ने अंटार्कटिका में पड़ रही इस गर्मी के लिए दो कारणों को वजह माना है. इनमें पहला है जलवायु परिवर्तन और दूसरा है, ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में बना एक उच्च दबाव का क्षेत्र, जिससे अंटार्कटिका के वातावरण में गर्म हवा और नमी की मात्रा बढ़ी है.

ये खतरा कोरोना वायरस से भी बड़ा

Satellite से ली गई तस्वीरें अंटार्कटिका के मौसम में आए इस बदलाव की भयावहता को बयां कर रही हैं. तस्वीर में ट्यूब जैसे आकार की चीज नजर आ रही है, वो एक बड़ा Ice Berg है. यानी बर्फ का एक विशाल पहाड़ है, जो अब टूट कर अलग हो गया है. इस Ice-Berg का क्षेत्रफल 1200 वर्ग किलोमीटर था. यानी ये क्षेत्रफल के मामले में इटली की राजधानी रोम, अमेरिका के Los Angeles शहर और भारत की राजधानी दिल्ली के लगभग बराबर था. लेकिन अब ये पहाड़ टूट कर अलग हो गया है. आपको लग सकता है कि अंटार्कटिका में पिघलते ग्लेशियर और बर्फ के पहाड़ से आपका क्या लेना देना. लेकिन ऐसा नहीं है. तेजी से पिघलते ग्लेशियर पृथ्वी पर मनुष्य के जीवन को समाप्त भी कर सकते हैं. यानी ये खतरा कोरोना वायरस से भी बड़ा और गम्भीर है. जो बातें किताबों में लिखी जाती हैं कि दुनिया खत्म हो जाएगी, उसका एक कारण ये ग्लेशियर ही हो सकते हैं.

..पृथ्वी का तापमान करीब 60 डिग्री तक बढ़ जाएगा

अंटार्कटिका में दुनिया के पहाड़ों पर मौजूद सभी ग्लेशियरों की तुलना में 50 गुना अधिक बर्फ है और अगर ये ग्लेशियर पिघल गए तो इससे पृथ्वी का तापमान करीब 60 डिग्री तक बढ़ जाएगा. ये इतना ज्यादा होगा कि इंसान इस गर्मी को आसानी से नहीं झेल सकेगा. दूसरा परिणाम ये होगा कि इससे दुनिया में पीने का शुद्ध पानी खत्म हो जाएगा और इंसान पीने के पानी के लिए भी संघर्ष करने लगेगा और इसके कुछ वर्षों के बाद पृथ्वी पर मनुष्य का जीवन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा. यानी पृथ्वी का स्वस्थ होना भी उतना ही जरूरी है, जितना आपका स्वस्थ रहना आवश्यक है. पृथ्वी पर इस समय करीब 2 लाख ग्लेशियर हैं. ये प्राचीन काल से पृथ्वी पर बर्फ का एक विशाल भंडार बने हुए हैं. ऐसे में ग्लेशियरों के पिघलने से जमीन पर रहने वाले दुनिया के उन लोगों पर असर पड़ता है, जिनके लिए ग्लेशियर ही पानी का प्रमुख स्रोत है. जैसे हिमालय के ग्लेशियर आसपास की घाटियों में रहने वाले 25 करोड़ लोगों और उन नदियों को पानी देते हैं, जो आगे जा कर करीब 165 करोड़ लोगों के लिए भोजन, ऊर्जा और कमाई का जरिया बनती है.

समुद्र का जलस्तर 9 इंच बढ़ गया है

IPCC की रिपोर्ट में एक रिसर्च के हवाले से चेतावनी दी गई है कि एशिया के ऊंचे पर्वतों के ग्लेशियर अपनी एक तिहाई बर्फ को खो सकते हैं. ये स्थिति भी तब होगी जब इंसान ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को रोकने में कामयाब हो जाए और दुनिया के तापमान में इजाफे को 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित कर दिया जाए. यानी दुनिया का बढ़ता यही तापमान Global Warming है. वायुमंडल में ग्रीन हाउस गैसों जैसे मीथेन, कार्बन डाय ऑक्साइड, और क्लोरो-फ्लूरो-कार्बन के बढ़ने के कारण पृथ्वी के औसत तापमान में होने वाली बढ़ोतरी को ही ग्लोबल वार्मिंग कहा जाता है. इसकी वजह से जलवायु परिवर्तन भी होता है. एक Study के मुताबिक वर्ष 1980 के बाद से समुद्र के जलस्तर में औसतन 9 इंच का अंतर आया है. यानी समुद्र का जलस्तर 9 इंच बढ़ गया है. इसकी बड़ी वजह Global Warming है, जिससे आइसबर्ग पिघलते हैं और फिर टूटकर समुद्र में गिर जाते हैं. अगर समुद्र का ये जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो अनुमान है कि अगले 60 वर्षों में मुम्बई, बेंगलूरु, और पश्चिमी भारत के कई समुद्री इलाके डूब जाएंगे.

मार्च में मई और जून वाली गर्मी

Potsdam Institute For Climate Impact Research का कहना है, 'पिछले 100 वर्षों में, दुनिया के समुद्र तल में 35 प्रतिशत इजाफा ग्लेशियरों के पिघलने की वजह से हुआ है.' ये सिलसिला अब भी जारी है. अनुमान है कि भविष्य में ग्लेशियरों के पिघलने से समुद्र तल का बढ़ना 30 से 50 सेंटीमीटर तक सीमित रहेगा क्योंकि अब इन ग्लेशियरों के पास कम ही बर्फ बची है. सरल शब्दों में कहें तो तेजी से पिघलते ग्लेशियर और टूटते Ice Shelf पृथ्वी के बिगड़ते स्वास्थ्य का एक बड़ा लक्षण है और इसके लिए जरूरी है कि दुनिया इस विषय को सिर्फ Seminar और गोष्ठियों तक सीमित ना रखे. क्योंकि गर्मी सिर्फ़ अंटार्कटिका में नहीं पड़ रही. बल्कि उत्तर भारत के भी कई इलाक़ों में इस समय तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है. यानी महीना तो मार्च का चल रहा है. लेकिन गर्मी मई और जून वाली पड़ रही है.

सबसे बड़ा कारण जलवायु परिवर्तन

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार का दिन इस सीज़न का सबसे गर्म दिन रिकॉर्ड किया गया. दिल्ली में तापमान 39.1 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. जो सामान्य से सात डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा है. यानी इन दिनों में तापमान होना चाहिए 33 डिग्री सेल्सियस लेकिन ये 40 डिग्री के पास पहुंच गया है. कुछ इलाक़ों में तो तापमान 42 डिग्री सेल्सियस को भी टच कर चुका है. इसीलिए लोग पूछ रहे हैं कि दिल्ली का अभी ये हाल है तो मई और जून के महीने में क्या होगा? दिल्ली ही नहीं, राजस्थान, मध्य प्रदेश, झारखंड और गुजरात में भी मार्च महीने में ही अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है. इस भीषण गर्मी का सबसे बड़ा कारण, जलवायु परिवर्तन ही है.

Coconut Water Benefits नारियल पानी आपकी सेहत के लिए काफी फायदेमंद होता है। इसमें कई तरह के पोषक तत्व पाए जाते हैं जिनमें फाइबर विटामिन-C मैग्नीशियम कैल्शियम पोटेशियम सोडियम आदि शामिल हैं। नारियल पानी आपको हाइड्रेट रखने के साथ वजन कम करने में भी मदद करता है।


Coconut Water Benefits: गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा रखने के लिए नारियल पानी भी अच्छा माना जाता है। इसका पानी न सिर्फ स्वाद में मज़ेदार होता है बल्कि शरीर को कई तरह के फायदे भी पहुंचाता है। जिनमें से एक वज़न घटाना भी है।

आज के समय में बढ़ा हुआ वजन एक गंभीर समस्या बन गई है। लोग अपने मोटापे से बेहद परेशान रहते हैं और हो भी क्यों न मोटापा अपने साथ कई तरह की बीमारियां लेकर आता है।

इस समस्या से बचने के लिए आप या तो एक्साइज कर सकते हैं या फिर अपनी डाइट में कुछ बदलाव। अगर आपको नारियल पानी पसंद है, तो इसे अपनी डाइट में ज़रूर शामिल करें।

आइए जानें नारियल पानी के फायदे

भूख को कंट्रोल करता है

नारियल पानी में भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो लंबे समय तक हमारे पेट को भरा हुआ महसूस कराता है। जिससे आपको भूख कम लगती है और आप बार-बार खाने से बचते हैं।

कैलोरी को कम करता है

नारियल पानी में कैलोरी की मात्रा काफी कम होती है। यही कारण है कि नारियल पानी वजन कम करने के लिए फायदेमंद है। एक कप नारियल पानी में 46 कैलोरी होती है जो बहुत ही कम है।

मेटाबॉलिज्म को बूस्ट करता है

नारियल पानी शरीर के मेटाबॉलिज्म रेट में सुधार करता है और इसे धीमा नहीं होने देता। इसमें मौजूद पोटेशियम फैट को मांसपेशियों में बदलता है और वजन नहीं बढ़ने देता है।

इम्यूनिटी बढ़ाता है

गर्मियों के इस मौसम में नारियल पानी आपका वजन कम करने के साथ-साथ आपकी इम्यूनिटी को भी बढ़ाता है। नारियल पानी के सेवन से आपके शरीर में पानी की कमी नहीं होती और आप हाइड्रेट रहते हैं।

नारियल पानी पीने का सही समय

वैसे तो नारियल पानी आप किसी भी समय पी सकते हैं, लेकिन वजन कम करने के लिए अगर आप डाइट प्लान और एक्सरसाइज कर रहे हैं, तो इसे वर्कआउट के कुछ समय बाद पिएं। ये एक एनर्जी ड्रिंक के रूप में काम करेगा। पीने का सही समय वेट लॉस की प्रक्रिया को तेज कर देता है।

आप सुबह के समय खाली पेट भी नारियल पानी पी सकते हैं, इस समय उसकी वजन कम करने की प्रक्रिया दोगुना तेज हो जाती है।




कॉलेज के दौरान यदि बच्चे में ये एक अच्छी आदत डाल देंगे तो उसकी सेहत और उसका करियर दोनों पर खुद उसकी कमांड होगी. जानें, सुबह जल्दी उठने की आदत कैसे उसके जीवन में खुशियां भर देगी.

सुबह उठने के फायदों के बारे में बच्चों को जरूर बताना चाहिए. क्योंकि ज्यादातर बच्चे स्कूल के दिनों में तो सुबह सवेरे उठकर तैयार होते हैं और दिनभर खेलकूद में भी व्यस्त रहते हैं. लेकिन ज्यादातर बच्चों के मन में यही बात रहती है कि सुबह इसलिए उठा जाता है क्योंकि स्कूल जाना होता है. यही वजह है कि कॉलेज लाइफ में आने के बाद ज्यादातर बच्चे सुबह 8 से 9 बजे तक सोकर उठने लगते हैं. क्योंकि कॉलेज क्लासेज आमतौर पर लेट ही शुरू होती हैं. 

हर माता-पिता चाहते हैं कि उनका बच्चा स्वस्थ, बुद्धिमान और ऐक्टिव रहे. इसीलिए  बच्चों को और खासतौर पर टीनेजर बच्चों को  सुबह उठने की इंपॉर्टेंस के बारे में जरूर बताएं. यह एक ऐसी आदत है जो बच्चों को ना केवल हेल्दी लाइफ जीने में मदद करेगी बल्कि वे करियर में लगातार नई ऊंचाइयां छू पाएंगे. सुबह उठने की अच्छी आदत कैसे बच्चों को सफल इंसान बनाती है, आइए जानते हैं.

बच्चा इन मानसिक रोगों से बचा रहता है..

  • तनाव
  • डिप्रेशन
  • बहुत अधिक गुस्सा आना
  • सांस संबंधी समस्याएं

सेल्फ ग्रोथ में मिलती है मदद.

  • सुबह उठने पर बच्चे को अपने लिए पर्सनल स्पेस और मी-टाइम मिल पाता है. इससे वह भावनात्मक रूप से मजबूत बनता है.
  • सुबह उठने पर टाइम मैनेजमेंट का तरीका आता है और सभी काम निर्धारित समय पर करने की आदत बनती है. इससे परफॉर्मेंस एंग्जाटी दूर रहती है.
  • कई अलग-अलग रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है, सूर्योदय से पहले जागने पर याददाश्त अच्छी रहती है. इसलिए अल्जाइमर जैसे गंभीर मानसिक रोगों से बचाव में मदद मिलती है.

सेहत के लिए फायदे..

  • सुबह जल्दी उठने पर रात को समय पर नींद आती है और गहरी नींद आती है. इससे मानसिक-शारीरिक थकान दूर होती है और फिर अगले दिन आप अपने सभी काम पूरी एनर्जी के साथ कर पाते हैं.
  • जब रात को नींद पूरी होती है तो अगले दिन शरीर को ऊर्जा बनाने के लिए एक्स्ट्रा शुगर की जरूरत नहीं होती. इसलिए मीठे की क्रेविंग कम होती है. यानी आप डायबिटीज की बीमारी से सुरक्षित रहते हैं.
  • जल्दी उठकर समय से तैयार होने की आदत से आपको अपना नाश्ता आराम से बैठकर करने का पूरा समय मिलता है.
  • अच्छी नींद लेने से डार्क सर्कल की समस्या नहीं होती और स्किन का ग्लो भी बढ़ता है. यानी बच्चों को कॉलेज और अर्ली प्रफेशनल लाइफ के दौरान ज्यादा कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स की जरूरत नहीं पड़ती. इससे वे गैरजरूरी केमिकल्स से दूर रहते हैं.





Staff Nurse Male Admit card 2022: स्टॉफ नर्स (पुरुष) प्रारंभिक परीक्षा 10 अप्रैल को प्रयागराज एवं लखनऊ के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की जाएगी. यह सुबह 11 से अपराह एक बजे तक आयोजित की जाएगी.

UPPSC Staff Nurse Male Admit card 2022 @uppsc.up.nic.in: उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने स्टॉफ नर्स (पुरुष) प्रारंभिक परीक्षा के एडमिट कार्ड जारी कर दिए हैं. जिन अभ्यर्थियों ने इसके लिए रजिस्ट्रेशन कराया है वे UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं 
स्टॉफ नर्स (पुरुष) प्रारंभिक परीक्षा 10 अप्रैल को  प्रयागराज एवं लखनऊ के विभिन्न केंद्रों में आयोजित की जाएगी. यह सुबह 11 से अपराह एक बजे तक आयोजित की जाएगी. परीक्षा में शामिल होने के लिए उम्‍मीदवार के पास वैध एडमिट कार्ड का प्रिंट आउट होना अनिवार्य है. बिना एडमिट कार्ड के परीक्षा में बैठने नहीं दिया जाएगा. अभ्यर्थी अपने रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि की मदद से आयोग की वेबसाइट पर जाकर एडमिट कार्ड डाउनलोड कर सकते हैं 
  • UPPSC Staff Nurse Male 2022: परीक्षा का एडमिट कार्ड ऐसे डाउनलोड करें 
  • UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट  uppsc.up.nic.in पर जाएं
  • वेबसाइट की होम पेज पर "CLICK HERE TO DOWNLOAD ADMIT CARD FOR ADVT.NO.A-1/E-1/2022, STAFF NURSE (MALE) EXAM-2017 RE-ADVERTISEMENT YEAR-2022" लिंक पर क्लिक करे. 
  • अब अपना रजिस्ट्रेशन नंबर, डेट ऑफ बर्थ और अन्य जानकारी भरकर डाउनलोड एडमिट कार्ड पर क्लिक करें 
  • सबमिट करते ही एडमिट कार्ड स्क्रीन पर खुल जाएगा.
  • एडमिट कार्ड डाउनलोड करें और आगे के इस्तेमाल के लिए प्रिंट लेकर रखें 


Business Career Options 2022: 
जब करियर के चुनाव की बात आती है तो अधिक सैलरी की इच्छा रखने वाले प्रोफेशनल्स के लिए बिजनेस करियर ऑप्शन सबसे पहले सामने आते हैं। बिजनेस करियर के विकल्पों में भविष्य बनाने से न सिर्फ शुरूआत में ही अच्छे वेतन की उम्मीद की जा सकती है, बल्कि इन ऑप्शन में एंट्री के बाद भी साल दर साल ग्रोथ बहुत अच्छी होती है। इसके अतिरिक्त तेजी से उभरते इन लेटेस्ट बिजनेस करियर ऑप्शंस 2022 में न सिर्फ जॉब के अवसर भी काफी अधिक हैं, बल्कि इनमें कुछ वर्षों के अनुभव के बाद प्रोफेशनल्स जॉब के साथ-साथ या फुल-टाइम कंसल्टेंट के तौर पर एक से अधिक कंपनियों में जुड़कर अच्छी अर्निंग कर सकते हैं। आइए, बारी-बारी से इन विकल्पों के बारे में जानते हैं:-

इकोनॉमिस्ट

वैसे तो इकोनॉमिस्ट के तौर बिजनेस करियर का विकल्प नया नहीं है, लेकिन तेजी से बदलते ग्लोबल बिजनेस ऑपरेशंस और मल्टीनेशनल कंपनियों की मौजूदगी से इकोनॉमिस्ट की भूमिका बढ़ती जा रही है। न सिर्फ एमएनसी या कॉरपोरेट, बल्कि मिड-साइज कंपनियों और विभिन्न इकोनॉमिक रिसर्च ऑर्गेनाइजेशंस में भी जॉब के अवसर मिल रहे हैं। एक अनुमान के मुताबिक, इकोनॉमिस्ट करियर ऑप्शन का चुनाव करने वाले प्रोफेशनल अगले 10 वर्षों में 13 फीसदी से अधिक की ग्रोथ की उम्मीद कर सकते हैं।

एचआर मैनेजर

इकोनॉमिस्ट की तरह ही एचआर मैनेजर के तौर पर बिजनेस करियर ऑप्शन नया नहीं है, लेकिन कंपनियों के बदलते कामकाजी स्वरूप में ह्यूमन रिसोर्स मैनेजर की भूमिका सिर्फ इम्प्लॉई को हायर करने, उनकी सैलरी बनाने और रिव्यू तक ही सीमित नहीं रही गई है। एचआर मैनेजर अब बड़ी कंपनियों एक बिजनेस पार्टनर के तौर पर भूमिका अदा कर रहे हैं, उनके कार्यों में इम्प्लॉई मोटिवेशन,इंगेजमेंट, और इनकरेजमेंट के साथ-साथ मैनेजेंट और इम्प्लॉई में कम्युनिकेशन चैनल के काम शामिल हो चुके हैं। इस सेक्टर में प्रोफेशनल अगले सालों में 9 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद कर सकते हैं।

टॉप बिजनेस करियर ऑप्शंस 2022 की लिस्ट में मैनेजमेंट एनालिस्ट को सबसे तेजी से उभरते विकल्पों में से एक के तौर पर शामिल किया जा सकता है। इस सेक्टर में 10 वर्षों में 14 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद है। मैनेजमेंट एनालिस्ट वर्क प्रोफाइल में कंपनी के प्रदर्शनों का विश्लेषण करना, समस्याओं का डाटा के आधार पर हल सुझाना, विदेशी बाजारों आदि के लिए मैनेजमेंट को सुझाव देना, आदि शामिल हैं।

फाइनेंशियल एनालिस्ट

वहीं, फाइनेंशियल एनालिस्ट की बात करें तो इन प्रोफेशनल की भूमिका फाइनेंशियल रिपोर्ट, तैयार करना, कंपनी के वित्तीय कार्यों का मूल्यांकन करना, विदेशी निवेश के मौके सुझाना, आदि शामिल हैं। इस सेक्टर की अगले 10 वर्षों में 6 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान है।

इंटरनेशनल मार्केटिंग मैनेजर

ग्लोबल बिनस ऑपरेशंस के इस दौर में इंटरनेशनल मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम करने वाले प्रोफेशनल्स की डिमांड बढ़ रही है और इसमें 10 वर्षों में 10 फीसदी से अधिक का अनुमान है। इंटरनेशनल मार्केटिंग मैनेजर के कार्यों में कंपनी की वस्तुओं एवं सेवाओं की विदेशी बाजारों में कीमत निर्धारण, विदेशों में ग्राहक बनाने के अवसरों की तलाश करना, बजट का निर्धारण करना, मीडिया विज्ञापन, आदि शामिल हैं।

तेजी से यूनिकार्न में बदल रहे स्टार्टअप ने युवाओं में यह उम्मीद जगाई है कि वे भी स्वावलंबन की राह पर चलते हुए एंटरप्रेन्योरशिप के क्षेत्र में अपने सपने सच कर सकते हैं और रोजगार देने वाला बनकर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान कर सकते हैं।


रेखा सेठी। आज की परिस्थितियों को देखते हुए देश के युवाओं में बेरोजगारी कम करने और उनमें रोजगार क्षमता बढ़ाने के लिए उच्च शिक्षण संस्थानों को अपने यहां ज्यादा से ज्यादा इनोवेशन, रिसर्च और विकास पर जोर देने की जरूरत है। युवाओं में रोजगार कौशल बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थानों के भीतर और बाहर नवीन प्रशिक्षण रणनीति को अपनाने की लगातार आवश्यकता है। शिक्षण संस्थानों में ऐसा इसलिए करना जरूरी है, क्योंकि छात्रों की रचनात्मकता और समस्या समाधान कौशल को बढ़ावा देने में शिक्षण स्टाफ की भागीदारी की बहुत आवश्यकता होती है, जो अभी तक अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा है। इसी का परिणाम है कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में शिक्षित व्यक्तियों की बेरोजगारी दर करीब 11.4 प्रतिशत है, जबकि भारत की आधी आबादी 25 वर्ष से कम है और लगभग 66 प्रतिशत लोग 35 से कम उम्र के हैं।

भले ही देखने में यह छोटा प्रतिशत लगता है, लेकिन भारत जैसे विशाल देश (दुनिया की दूसरी बड़ी जनसंख्या) में यह बहुत बड़ी संख्या है। इसलिए इस दिशा में सकारात्मक पहल की बहुत जरूरत है। साथ ही, छात्रों को अपने एकेडमिक प्रोजेक्ट के माध्यम से खुद भी उद्यमिता और प्रबंधन दक्षता हासिल करने पर ध्यान देना चाहिए। वैसे, बहुचर्चित नई शिक्षा नीति (एनईपी 2020) द्वारा शिक्षा को कामर्स और इंडस्ट्री से जोड़ने में प्रमुख भूमिका निभाने की उम्मीद की जा रही है। इससे शिक्षा के हर स्तर पर व्यावसायिक कौशल को ज्यादा से ज्यादा महत्व दिये जाने पर डिमांड और सप्लाई में अभी जो गैप है, वह कम होगा। युवाओं ने अपने शिक्षकों से क्या सीखा और अपनी आमदनी पैदा करने के लिए उन्हें क्या सीखने और जानने की जरूरत है, उनमें यह समझ जैसे-जैसे विकसित होगी, अंतर खुद ब खुद दिखना शुरू हो जाएगा।

इसके साथ ही अर्थव्यवस्था को भी तेजी से विकसित करना होगा, ताकि शिक्षण संस्थानों से निकलने वाले युवाओं की विशाल संख्या समायोजित हो सके यानी उन्हें समय पर समुचित नौकरी मिल सके। छात्रों की रोजगार क्षमता बढ़ाने में शिक्षकों की भूमिका को भी पहचानने और बढ़ाने की जरूरत है। कुल मिलाकर, एनईपी 2020 तभी फर्क ला सकता है, जब शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण में अधिक निवेश किया जाएगा। देखा जाए तो अभी और आने वाले दिनों में डिजिटल ट्रेनिंग शिक्षित युवाओं के लिए नई नौकरियों का एक प्रमुख माध्यम हो सकता है।

तकनीक के अनुरूप नये पाठ्यक्रम: आज के स्टार्टअप और यूनिकार्न युग में निश्चित रूप से मैनेजमेंट एजुकेशन में भी बदलाव लाने की जरूरत है। इस दिशा में प्रयास भी शुरू हो गए हैं। अब मैनेजमेंट एजुकेशन भी टेक्नोलाजी के अनुरूप हो रही है और ऐसे पाठ्यक्रम शुरू किये जा रहे हैं, जो बिजनेस और डिजिटल स्किल को आपस में जोड़ते हैं। उदाहरण के तौर पर नये पाठ्यक्रमों में डाटा साइंस, डिजिटल ट्रांसफार्मेशन और डिजाइन थिंकिंग जैसी चीजें शामिल की जा रही हैं। इसके अलावा, बड़ी संख्या में बिजनेस स्कूलों ने अपने छात्रों को डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप से परिचित कराने के लिए स्टार्टअप इन्क्यूबेटरों का निर्माण किया है। 

रुझानों पर ध्यान देने की जरूरत: जो युवा एमबीए/पीजीडीएम या दूसरे मैनेजमेंट से जुड़े कोर्स करके मैनेजमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप की दिशा में अपनी योग्यता बढ़ाना चाहते हैं, उन्हें इकोनामी, बिजनेस और टेक्नोलाजी के रुझानों पर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्हें व्यावसायिक घटनाओं और मुद्दों पर नवीनतम जानकारी से लैस प्रबंधन संस्थानों से इस तरह का कोर्स करना चाहिए। ऐसे बिजनेस स्कूलों में छात्रों का फोकस मैनेजमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप स्किल्स सीखने में होना चाहिए। साथ ही, उन्हें बिजनेस और मैनेजमेंट से जुड़ी पत्र-पत्रिकाओं को भी नियमित रूप से पढ़ते रहना चाहिए। इसके अलावा, उन्हें लगातार यह सोचते रहना चाहिए कि वे अपने बिजनेस की यथास्थिति को कैसे बदल सकते हैं। इसके लिए उन्हें अपने कौशल के विकास पर काम करना चाहिए, जो प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण पहलू है। वहीं जो युवा इकोनामी और बिजनेस में गहरी रुचि नहीं रखते हैं, उन्हें एमबीए/पीजीडीएम जैसे पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के दौरान दिक्कत होने के साथ-साथ वैसी आकर्षक नौकरियां मिलने के अवसर बहुत कम रहते हैं, प्रबंधन की डिग्री या डिप्लोमा प्राप्त करने के बाद जिनकी उम्मीद की जाती है।

एंटरप्रेन्योरशिप की राह पर ऐसे बढ़ा सकते हैं कदम

  • छात्रों को पढ़ाई के दौरान अपने एकेडमिक प्रोजेक्ट के माध्यम से खुद भी उद्यमिता और प्रबंधन दक्षता हासिल करने की पहल करनी चाहिए।
  • मैनेजमेंट और एंटरप्रेन्योरशिप की दिशा में अपनी योग्यता बढ़ाने की इच्छा रखने वाले युवाओं को इकोनामी, बिजनेस और टेक्नोलाजी के बदलते रुझानों पर लगातार ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • कई बार परिस्थितियों के अनुसार बिजनेस में बदलाव लाने की जरूरत होती है, इस बात को ध्यान में रखते हुए युवाओं को अपने कौशल पर काम करना चाहिए। प्रबंधन की दृष्टि से यह महत्वपूर्ण पहलू है।
  • स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवा के पास कोई इनोवेटिव आइडिया होना चाहिए। साथ ही, इस बारे में स्पष्ट प्लान और रणनीति होनी चाहिए कि उस आइडिया को कैसे प्रतिस्पर्धी बिजनेस का रूप दिया जा सकता है।
  • यह जानना भी बहुत जरूरी है कि अपना ग्राहक आधार किस तरह बढ़ाया जाए।

समुचित योजना बनाकर बढ़ें आगे: यह सही है कि इनदिनों नये-नये तरह के स्टार्टअप शुरू करने को लेकर युवाओं में काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। लेकिन युवाओं को किसी भी तरह का स्टार्टअप शुरू करने से पहले कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए, ताकि वे सफलता के साथ आगे बढ़ सकें। इसके लिए सबसे पहले स्टार्टअप शुरू करने की इच्छा रखने वाले युवा के पास कोई इनोवेटिव आइडिया होना चाहिए। साथ ही, उस आइडिया को कैसे प्रतिस्पर्धी बिजनेस का रूप दिया जाए, इसके लिए स्पष्ट प्लान और रणनीति होनी चाहिए। इसमें मुख्य चीज यह जानने में होना चाहिए कि वे ग्राहकों को अपने पास तक कैसे ले आएंगे और ग्राहक आधार कैसे बढ़ाएंगे। उन्हें अपनी टीम के लिए ऐसे प्रासंगिक ज्ञान और कौशल वाले लोगों की तलाश करनी चाहिए, जो उनके साथ उनके वेंचर में काम करने के लिए इच्छुक हों। अपने बिजनेस प्लान के बारे में निवेशकों को आश्वस्त कैसे करना है, उन्हें यह भी आना चाहिए। इस तरह, एक बार जब आइडिया और प्लान से लेकर रणनीति, क्षमता, टीम और फंडिंग के लेकर होमवर्क हो जाए, तब विश्वास के साथ बाजार में प्रवेश करना चाहिए।